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एक और कदम शिक्षा की तरफ
11 Sep 2026 Umesh Kumar

एक और कदम शिक्षा की तरफ

जब भी हम किसी कार्य का चुनाव करते हैं, तो सबसे पहले हमारे मन में कुछ प्रश्न उठते हैं—इस कार्य को चुनने का उद्देश्य क्या है? हमने यह कदम क्यों उठाया है? इसकी सफलता कितनी दूर तक होगी? इसमें कौन हमारे साथ जुड़ेगा और कौन नहीं?

लेकिन कभी-कभी कुछ कार्य ऐसे होते हैं, जिनकी शुरुआत किसी बड़े विचार या विस्तृत योजना से नहीं, बल्कि मन में उठे एक छोटे-से संकल्प से होती है—“करना है।”

निर्मल काउंसिल की स्थापना के समय मेरे मन में भी बस यही एक विचार था—कुछ करना है, समाज के लिए करना है और निरंतर करना है। रास्ता कितना कठिन होगा, कितनी चुनौतियाँ आएंगी, कितने लोग साथ चलेंगे और कितने रास्ते में छूट जाएंगे—इन सबका उत्तर उस समय हमारे पास नहीं था। लेकिन विश्वास था कि यदि उद्देश्य नेक हो और प्रयास ईमानदार हों, तो रास्ते स्वयं बनते चले जाते हैं।

इस यात्रा में नेहा जी का कॉर्डिनेटर के रूप में जुड़ना और पूरी निष्ठा एवं मेहनत के साथ कार्य करना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा। उनके साथ नीरज जी और रोहित जी का योगदान भी हर कदम पर, हर परिस्थिति में मिलता रहा। इन सभी साथियों की मेहनत, सहयोग और विश्वास ने निर्मल काउंसिल को आगे बढ़ने की शक्ति दी।

आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता है कि वह छोटा-सा संकल्प धीरे-धीरे एक उद्देश्यपूर्ण यात्रा का रूप ले चुका है। आज हम अपने प्रगति पथ पर सफलता के साथ आगे बढ़ रहे हैं, और यह यात्रा केवल हमारी नहीं है—यह उन सभी लोगों की है जिन्होंने किसी न किसी रूप में हमारा साथ दिया, हमारे उद्देश्य पर विश्वास किया और हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाया।

इसी क्रम में आज अत्यंत हर्ष, उत्साह और गर्व के साथ यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि नर्सरी से कक्षा पाँचवीं तक की बच्चियों की शिक्षा के लिए एक नई संस्था के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। जोकि पुर्णतः निःशुल्क होगा ,यह विचार अब केवल मन की कल्पना नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे एक वास्तविक स्वरूप ले रहा है।

हमारा प्रयास है कि छोटी बच्चियों को ऐसी शिक्षा और वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जहाँ वे केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि सीखें, समझें, खेलें, प्रश्न पूछें, अपनी प्रतिभा को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

बहुत जल्द इस नए परिसर में नन्हीं बच्चियों की किलकारियाँ और कलरव सुनाई देंगे। कहीं उनकी उछल-कूद होगी, कहीं खेल होगा, कहीं हँसी की आवाज होगी और कहीं छोटी-छोटी आँखों में बड़े-बड़े सपने दिखाई देंगे। कोई अक्षर लिखना सीख रही होगी, कोई पहली बार किताब पढ़ेगी, कोई चित्र बनाएगी और कोई अपनी कल्पना की दुनिया को शब्दों में ढालने का प्रयास करेगी।

हम चाहते हैं कि इन नन्हीं बेटियों के हाथों में केवल किताबें ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य को गढ़ने का अवसर हो। उनके सपनों को दिशा मिले, उनकी प्रतिभा को मंच मिले और उनके भीतर यह विश्वास पैदा हो कि वे भी जीवन में अपनी पहचान बना सकती हैं।

यह पहल केवल एक स्कूल या संस्था बनाने का प्रयास नहीं है। यह एक बेहतर भविष्य की नींव रखने का प्रयास है। क्योंकि एक बच्ची को शिक्षित करना केवल एक व्यक्ति को शिक्षित करना नहीं है, बल्कि आने वाली पूरी पीढ़ी को मजबूत बनाना है।

आज इस यात्रा का एक और अध्याय शुरू हो रहा है। हमें विश्वास है कि जिस तरह निर्मल काउंसिल ने अपने शुरुआती संकल्प से आज तक का सफर तय किया है, उसी तरह यह नई पहल भी आने वाले समय में अनेक बेटियों के जीवन में शिक्षा, आत्मविश्वास और नई संभावनाओं का प्रकाश लेकर आएगी।

यह शुरुआत छोटी जरूर है, लेकिन हमारा सपना बहुत बड़ा है।

हमारी कोशिश रहेगी कि आने वाले समय में इन नन्हीं बेटियों की हँसी, उनकी सीखने की उत्सुकता और उनकी सफलता ही इस प्रयास की सबसे बड़ी पहचान बने।

एक कदम शिक्षा की ओर,
एक कदम बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की ओर,
और एक कदम समाज को बेहतर बनाने की दिशा में।

यात्रा अभी शुरू हुई है…
मंजिलें अभी बहुत दूर हैं, लेकिन विश्वास है कि कदम लगातार आगे बढ़ते रहेंगे।